मुख्य बातें:
वर्ष 2020 की जल आयोग की रिपोर्ट में इंद्रावती नदी के तटों पर बढ़ते मृदा कटाव की चिंता सामने आई थी।
रिपोर्ट के अनुसार बारिश के समय नदी के एक लीटर पानी में लगभग 2 ग्राम मिट्टी पाई गई, जो तटों से बड़े पैमाने पर मिट्टी बहने का संकेत है।
समिति ने नदी के दोनों किनारों पर लगभग 80 हजार पौधे लगाने की मांग की है।
बस्तर जिले की 5 जनपद पंचायतों की करीब 64 ग्राम पंचायतों में पौधारोपण के लिए स्थल पहले ही चिन्हित किए जा चुके हैं।
नदी के किनारों पर हरी सुरक्षा पट्टी (Green Belt) विकसित करने की मांग की गई है। इससे मिट्टी के कटाव को रोकने और जैव विविधता बचाने में मदद मिलेगी।
समिति के अनुसार गाद जमाव, औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और अन्य मानवीय गतिविधियां इंद्रावती नदी के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बड़ी चुनौती बन रही हैं।
समिति ने स्थानीय परिस्थितियों और वैज्ञानिक तरीके से पौधारोपण कर समस्या का दीर्घकालीन समाधान करने की बात कही।
प्रतिनिधिमंडल में दशरथ कश्यप, किशोर पारख, वृक्ष मित्र सम्पत झा सहित अभियान के सदस्य शामिल रहे।