जगदलपुर स्थित शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में पतंजलि योग संस्था एवं राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के तहत पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पतंजलि योग संस्था से मनोज पाणिग्राही जी उपस्थित रहे। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री अभिषेक अवस्थी जी, NSS प्रमुख सजीवन साहू, भुनेश्वर साहू, सोहनलाल साहू सहित विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, अधिकारी एवं अन्य सदस्य मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न पौधों का रोपण किया गया। उपस्थित अतिथियों और विद्यार्थियों ने पौधों को रोपित कर उनके संरक्षण एवं नियमित देखभाल का संकल्प लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और अधिक से अधिक पौधे लगाने के लिए प्रेरित करना रहा।
इस अवसर पर साल वन की विशेषताओं के बारे में भी जानकारी दी गई। बताया गया कि साल बस्तर के प्रमुख वन वृक्षों में से एक है और यहां के प्राकृतिक पर्यावरण तथा जैव विविधता में इसका महत्वपूर्ण योगदान है। साल वृक्ष को स्थानीय स्तर पर हेलीकॉप्टर ट्री के नाम से भी जाना जाता है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों को बस्तर के वनों की उपयोगिता एवं उनके संरक्षण के महत्व से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम में बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और घटते हरित क्षेत्र को देखते हुए वृक्षारोपण की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि पेड़ केवल वातावरण को शुद्ध करने का काम नहीं करते, बल्कि मिट्टी संरक्षण, जल संतुलन, जैव विविधता और मानव जीवन के लिए भी बेहद जरूरी हैं। इसलिए पौधे लगाने के साथ-साथ उनकी देखभाल और संरक्षण करना भी प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के दौरान बस्तर की समृद्ध जैव विविधता और जड़ी-बूटियों के संरक्षण पर भी चर्चा की गई। बताया गया कि बस्तर क्षेत्र प्राकृतिक वनस्पतियों और विभिन्न प्रकार की औषधीय जड़ी-बूटियों से समृद्ध है। इन प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद जरूरी है। अनियंत्रित वनों की कटाई और पर्यावरणीय बदलावों के कारण कई वनस्पतियों के अस्तित्व पर प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
राष्ट्रीय सेवा योजना के इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया गया। उपस्थित लोगों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने, उनकी नियमित देखभाल करने और बस्तर की प्राकृतिक संपदा को संरक्षित रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम ने “एक पेड़ मां के नाम” की भावना को आगे बढ़ाते हुए प्रकृति के प्रति प्रेम, जिम्मेदारी और संरक्षण का संदेश दिया।
