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शिक्षा की ओर बढ़ते कदम:  (BASTAR ROOT WELFARE FOUNDATION ) ने लामडागुड़ा वनवासी कल्याण आश्रम में बच्चों को बांटी पठन सामग्री
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शिक्षा की ओर बढ़ते कदम: (BASTAR ROOT WELFARE FOUNDATION ) ने लामडागुड़ा वनवासी कल्याण आश्रम में बच्चों को बांटी पठन सामग्री

जगदलपुर :- शिक्षा से संवरता बस्तर: लामडागुड़ा वनवासी कल्याण आश्रम में 'दलन' (BRW Foundation) की एक अनूठी पहल

संपादकीय डेस्क संवाददाता
21 अगस्त 2026 2 मिनट का पठन अपडेट: 1 घंटे पहले
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जगदलपुर:- बस्तर अंचल के क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगाने की दिशा में एक सराहनीय पहल की गई है।  संस्था दलन (Bastar Root Welfare Foundation - BRW Foundation) द्वारा विकास खंड लोहंडीगुड़ा के ग्राम लामडागुड़ा स्थिति वनवासी कल्याण आश्रम में एक विशेष वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

​इस कार्यक्रम के दौरान संस्था के प्रतिनिधियों ने आश्रम में रह रहे ज़रूरतमंद और होनहार बच्चों से मुलाकात की और उन्हें पढ़ाई के लिए आवश्यक सामग्री—जैसे कॉपी, पेन, पेंसिल, ड्राइंग शीट और अन्य स्टेशनरी का वितरण किया। नई शैक्षणिक सामग्री पाकर आश्रम के बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे।

बच्चों का बढ़ाया हौसला

​कार्यक्रम में मौजूद BRW Foundation के सदस्यों ने बच्चों से संवाद स्थापित कर उन्हें शिक्षा का महत्व समझाया और भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। संस्था के प्रतिनिधियों ने कहा कि बस्तर के दूर-दराज इलाकों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें सही मार्गदर्शन और संसाधनों की ज़रूरत है। फाउंडेशन का मुख्य उद्देश्य इन्हीं दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों तक पहुंचकर उनकी पढ़ाई में आ रही बाधाओं को दूर करना है।

स्थानीय लोगों ने की सराहना

​वनवासी कल्याण आश्रम लामडागुड़ा के प्रबंधकों और स्थानीय ग्रामीणों ने 'दलन' (BRW Foundation) की इस मानवीय पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से बस्तर के अंतिम छोर पर बैठे बच्चों को भी आगे बढ़ने का अवसर और प्रोत्साहन मिलता है।

भविष्य में भी जारी रहेंगे ऐसे प्रयास

​BRW Foundation के पदाधिकारियों ने आश्वस्त किया कि यह केवल एक शुरुआत है। आने वाले समय में बस्तर संभाग के अन्य सुदूर ग्रामीण व वनांचल क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य, शिक्षा और बाल विकास से जुड़ी ऐसी कल्याणकारी गतिविधियां निरंतर आयोजित की जाती रहेंगी।

​इस दौरान संस्था के प्रमुख सदस्य, आश्रम का स्टाफ और स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

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संपादकीय डेस्क desk

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