जगदलपुर : बस्तर की समृद्ध एवं विश्वविख्यात हस्तशिल्प परंपरा को संरक्षित करने के साथ-साथ स्थानीय शिल्पकारों और उनसे जुड़े परिवारों की आजीविका को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। इसी उद्देश्य से बुधवार को जिला पंचायत बस्तर के सभाकक्ष में स्वदेशी शिल्पकला पुनरुद्धार परियोजना के अंतर्गत कार्यशाला एवं महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में बस्तर के विभिन्न क्षेत्रों से आए शिल्पकारों, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, प्रशासनिक अधिकारियों एवं विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य बस्तर की पारंपरिक शिल्पकलाओं को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना तथा स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना रहा। इस दौरान 'बस्तर आर्ट्स' परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर 10-सूत्रीय कार्ययोजना के साथ पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। प्रस्ताव में पारंपरिक कला को संरक्षित रखने के साथ शिल्पकारों को बेहतर प्रशिक्षण, बाजार, तकनीक और आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।
पारंपरिक शिल्प को मिलेगा आधुनिक बाजार
परियोजना के तहत बस्तर की पहचान से जुड़ी ढोकरा कला, लौह शिल्प, काष्ठ कला, टेराकोटा, बांस शिल्प, कौड़ी शिल्प, सीसल कला तथा आदिवासी वेशभूषा को एक संगठित ब्रांड के रूप में विकसित करने की योजना है। इन उत्पादों को 'कलागुड़ी बस्तर आर्ट्स' ब्रांड के माध्यम से देश-विदेश के बाजारों में पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
इस पहल से स्थानीय कलाकारों को अपने पारंपरिक हुनर के लिए बेहतर बाजार मिलने की उम्मीद है। साथ ही युवाओं और महिलाओं को भी शिल्पकला से जोड़कर रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकेंगे।
शिल्पकारों की समस्याओं पर हुआ खुला संवाद
प्रस्तुतीकरण के बाद खुले संवाद सत्र का आयोजन किया गया। इसमें शिल्पकारों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कच्चे माल की उपलब्धता, आधुनिक उपकरणों की कमी, डिजाइन में बदलाव, बाजार तक पहुंच, उचित मूल्य और उत्पादन के लिए कार्यशील पूंजी जैसी समस्याओं को सामने रखा।
शिल्पकारों से मिले सुझावों को परियोजना की आगामी कार्ययोजना में शामिल किया गया है। प्रशासन की ओर से इन समस्याओं के व्यावहारिक समाधान के लिए क्लस्टर स्तर पर योजनाबद्ध तरीके से काम करने की बात कही गई।
क्लस्टर स्तर पर बनेगा रॉ मटेरियल बैंक
परियोजना के तहत शिल्पकारों की एक बड़ी समस्या कच्चे माल की उपलब्धता को दूर करने के लिए क्लस्टर स्तर पर रॉ मटेरियल बैंक स्थापित किए जाने की योजना है। इससे कारीगरों को आवश्यक सामग्री समय पर और सुविधाजनक तरीके से उपलब्ध हो सकेगी तथा उत्पादन में आने वाली बाधाएं कम होंगी।
इसके अलावा शिल्पकारों को आधुनिक डिजाइन, गुणवत्ता और उत्पादन तकनीक से परिचित कराने के लिए भारतीय शिल्प एवं डिजाइन संस्थान (IICD) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण एवं कौशल उन्नयन कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
'बस्तर ट्रेसकोड' से मिलेगी उत्पादों को पहचान
बस्तर के हस्तशिल्प उत्पादों की मौलिकता और प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए 'बस्तर ट्रेसकोड' तकनीक लागू करने की योजना भी प्रस्तावित है। इससे खरीदारों को उत्पाद के वास्तविक स्रोत और शिल्पकार से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलेगी। इससे बस्तर के पारंपरिक हस्तशिल्प की विश्वसनीयता बढ़ाने और नकली उत्पादों पर रोक लगाने में भी सहायता मिल सकती है।
वहीं, उत्पादन की निरंतरता बनाए रखने के लिए रोटेशनल वर्किंग कैपिटल फंड की व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया है। इससे शिल्पकारों को उत्पादन के दौरान आवश्यक आर्थिक सहायता उपलब्ध हो सकेगी।
लाइव डेमोंस्ट्रेशन और बिक्री केंद्र होगा आकर्षण का केंद्र
परियोजना के तहत एक विशेष लाइव डेमोंस्ट्रेशन एवं बिक्री केंद्र विकसित करने की योजना है। यहां देश-विदेश से आने वाले पर्यटक और शोधार्थी शिल्पकारों को पारंपरिक कलाकृतियां बनाते हुए प्रत्यक्ष देख सकेंगे। साथ ही पर्यटकों को बस्तर की कला और संस्कृति के बारे में जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रशिक्षित गाइड्स के माध्यम से इस केंद्र को सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय कलाकारों और समूहों को सीधे बिक्री का अवसर मिलेगा।
बिचौलियों की भूमिका कम कर सीधे बढ़ेगी शिल्पकारों की आय
परियोजना का प्रमुख लक्ष्य शिल्पकारों को बाजार से सीधे जोड़ना और बिचौलियों पर निर्भरता कम करना है। इससे हस्तशिल्प उत्पादों का उचित मूल्य शिल्पकारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से शिल्पकारों की आय में दो से तीन गुना तक सीधी बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा गया है।
बैठक में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला एवं ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक, नीति आयोग के PPI फेलो, TRIFED के प्रतिनिधि, गैर-सरकारी संगठनों के सदस्य तथा स्थानीय कलाकार प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
बस्तर की पारंपरिक कला केवल हस्तशिल्प नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति, परंपरा और जनजातीय जीवनशैली की पहचान है। प्रशासन, स्थानीय समुदाय और शिल्पकारों के इस साझा प्रयास से बस्तर की कला को संरक्षण देने के साथ उसे आधुनिक बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 'कलागुड़ी बस्तर आर्ट्स' के माध्यम से स्थानीय हुनर को नई पहचान मिलने और बस्तर के शिल्पकारों को आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनाने की उम्मीद है।