पुलिस की इस विशेष पहल के तहत गांव में चौपाल सजाई गई। गोंडी बोली के इस अभियान ('पुलिस आपके द्वार') के जरिए अधिकारियों ने ग्रामीणों के साथ ज़मीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों ने गांव में सड़क, पुल-पुलिया, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग रखी, जिस पर अधिकारियों ने हर संभव मदद और विकास कार्यों का भरोसा दिलाया।
बच्चों को पढ़ाई और युवाओं को खेल सामग्री का वितरण
जनसंवाद के साथ-साथ पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों के चेहरे पर मुस्कान लाने का काम भी किया:
- बच्चों के लिए: प्राथमिक व माध्यमिक शाला के बच्चों को स्कूल बैग, कॉपी, पेन व पेंसिल किट देकर नियमित स्कूल जाने के लिए प्रेरित किया गया।
- महिलाओं के लिए: गांव की महिलाओं को साड़ियां और वस्त्र वितरित किए गए।
- युवाओं के लिए: स्थानीय युवाओं को समाज की मुख्यधारा और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़े रखने के लिए खेल सामग्री सौंपी गई।
पुलिस का संदेश: सुरक्षा और सेवा ही पहला ध्येय
एसपी मयंक गुर्जर ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि सुकमा पुलिस हर परिस्थिति में ग्रामीणों की सुरक्षा और सेवा के लिए तत्पर है। उन्होंने लोगों से किसी भी भय या बहकावे में न आकर पुलिस-प्रशासन के साथ सीधे संपर्क और समन्वय बनाए रखने की अपील की।
अधिकारियों की इस संवेदनशील पहल से सुदूर व दुर्गम क्षेत्रों में पुलिस और जनता के बीच की दूरी कम हो रही है और विकास का नया मार्ग प्रशस्त हो रहा है।