सुकमा:शहीदों के परिजनों को मिला सम्मान स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर सुकमा परेड ग्राउंड में आयोजित गरिमामय एवं भव्य समारोह के दौरान डीआरजी (DRG) के अमर शहीदों—सहायक उप निरीक्षक रामू राम नाग, सहायक आरक्षक कुंजाम जोगा और आरक्षक वंजाम भीमा को मरणोपरांत वीरता पदक (गैलेंट्री मेडल) से अलंकृत किया गया। मुख्य अतिथि देवेंद्र प्रताप सिंह ने शहीदों के परिजनों को यह पदक प्रदान कर उनके अदम्य साहस, सर्वोच्च बलिदान और राष्ट्रसेवा को नमन किया।
तिरंगे की खातिर अंतिम सांस तक लड़े
25 फरवरी 2023 को जगरगुंडा थाना क्षेत्र के आश्रम पारा में चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियान के दौरान इन तीनों वीरों ने नक्सलियों के कायराना घात लगाकर किए गए हमले का पूरी निडरता से मुकाबला किया। कुंदेड़ कैंप से एरिया डोमिनेशन और सर्चिंग के लिए निकली डीआरजी टीम पर अचानक अंधाधुंध फायरिंग शुरू हो गई थी। गोलियों की बौछार के बीच इन वीरों ने मोर्चा संभाला और साथियों व क्षेत्र की सुरक्षा करते हुए अंतिम सांस तक संघर्ष किया। इसी मुठभेड़ में रामू राम नाग, कुंजाम जोगा और वंजाम भीमा वीरगति को प्राप्त हुए।
बदलाव की मजबूत नींव बना बलिदान
आज भले ही इन वीरों के परिजनों के हाथों में वीरता पदक सुशोभित है, लेकिन उन हाथों ने अपनों को खोने का गहरा दर्द भी झेला है। जिन आंगनों में कभी इनकी हंसी गूंजती थी, आज वहां इनकी शहादत की गाथाएं गूंजती हैं। ये जवान बस्तर के सुदूर गाँवों में बेखौफ लहराते तिरंगे को तो अपनी आंखों से नहीं देख पाए, लेकिन उस बदलते और समृद्ध बस्तर की नींव को अपने रक्त से सींचकर अमर हो गए।
नक्सलमुक्त लंबे संघर्ष का परिणाम
आज बस्तर के जिन अंदरूनी इलाकों में ग्रामीण आज़ादी का उत्सव मनाते हैं, बच्चे बेझिझक स्कूल जाते हैं और सुरक्षा बल विकास का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं, वहां इन शहीदों की गूंज साफ़ सुनाई देती है। नक्सल मुक्त बस्तर की ओर बढ़ता यह कदम केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्षों के कठिन संघर्ष और अनगिनत शहादतों का प्रतिफल है। रामू राम नाग, कुंजाम जोगा और वंजाम भीमा जैसे वीर इस संघर्ष के अमर नायक हैं, जिनका सपना आज शांत और सुरक्षित बस्तर के रूप में साकार हो रहा है।