अबूझमाड़ के कठिन रास्तों में चला रेस्क्यू अभियान
दिवालूर गांव से महिला को बाहर निकालना जवानों के लिए आसान नहीं था। लगातार बारिश के कारण रास्ते बेहद खराब थे। कई स्थानों पर कीचड़ और फिसलन के साथ-साथ पानी से भरे नाले भी पार करने पड़े।
रेस्क्यू टीम को रास्ते में दो लकड़ी के पुलों से गुजरना पड़ा। कुछ नालों में पानी की गहराई करीब 2 से 3 फीट तक थी। इन हालातों में भी जवान स्ट्रेचर को संभालते हुए आगे बढ़ते रहे।
सूचना मिलने के बाद गांव पहुंची मेडिकल टीम
3 सितंबर को बुदरी मंडावी के पति समेत तीन ग्रामीण दिवालूर COB पहुंचे। उन्होंने ITBP जवानों को महिला की गंभीर तबीयत के बारे में बताया। सूचना मिलने के बाद इंस्पेक्टर शिव प्रताप के नेतृत्व में 16 जवानों की मेडिकल-रेस्क्यू टीम गांव के लिए रवाना हुई।
महिला को स्ट्रेचर के जरिए बाहर लाया गया और दिवालूर COB में प्राथमिक उपचार एवं स्वास्थ्य जांच की गई। इसके बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें ओरछा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की तैयारी की गई।
अस्पताल पहुंचने से पहले थम गई जिंदगी
महिला को बोटेर COB की तरफ ले जाया जा रहा था। करीब 2:30 बजे मेडिकल स्टाफ ने रास्ते में उनकी दोबारा जांच की। जांच के दौरान जीवन के संकेत नहीं मिले। कुछ देर बाद टीम बोटेर COB पहुंची, जहां अधिकारियों को महिला की मौत की जानकारी दी गई।करीब 10 घंटे तक चले इस प्रयास के बावजूद बुदरी मंडावी को बचाया नहीं जा सका।
पति की इच्छा पर पार्थिव शरीर गांव ले गए जवान
महिला की मौत के बाद उनके पति ने अंतिम संस्कार पैतृक गांव दिवालूर में करने की इच्छा जताई। ITBP जवानों ने परिवार की इस इच्छा का सम्मान किया।
इसके बाद 27 सदस्यों की टीम ने महिला के पार्थिव शरीर को स्ट्रेचर पर रखा और वापस गांव की ओर रवाना हुई। बारिश और मुश्किल रास्तों के बीच टीम कई घंटे पैदल चली और शाम करीब 6:05 बजे दिवालूर गांव पहुंची।
जवानों ने पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया।
अबूझमाड़ में स्वास्थ्य सुविधाओं की चुनौती
इस घटना ने एक बार फिर अबूझमाड़ जैसे दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं और सड़क संपर्क की मुश्किलों को सामने ला दिया है। कई गांवों तक सामान्य परिस्थितियों में भी पहुंचना चुनौतीपूर्ण है और बारिश के मौसम में यह परेशानी और बढ़ जाती है।
बुदरी मंडावी को बचाया नहीं जा सका, लेकिन ITBP जवानों ने जिस तरह उन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए घंटों प्रयास किया और बाद में पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक गांव पहुंचाया, वह सुरक्षा बलों की मानवीय जिम्मेदारी की एक संवेदनशील तस्वीर पेश करता है।
मुख्य बातें
- महिला का नाम: बुदरी मंडावी
- उम्र: 51 वर्ष
- गांव: दिवालूर, अबूझमाड़
- बीमारी: करीब 17 दिनों से बुखार
- रेस्क्यू टीम: 16 सदस्यीय मेडिकल टीम
- रेस्क्यू में लगा समय: करीब 10 घंटे
- मुश्किलें: लगातार बारिश, कीचड़ और फिसलन
- नाले: 2 से 3 फीट तक पानी वाले नाले पार किए
- लकड़ी के पुल: दो लॉग ब्रिज पार किए गए
- महिला की मौत: बोटेर COB पहुंचने से पहले
- पार्थिव शरीर: 27 सदस्यीय दल ने गांव पहुंचाया
- दिवालूर पहुंचने का समय: शाम करीब 6:05 बजे